1.7 मिलियन साल पुराना सबूत: इंसान ने आग का इस्तेमाल किया
Study reveals 1.7 million-year-old evidence of early human ancestors interacting with fire in Wonderwerk Cave, South Africa.
इंसानों ने आग बनाना सीखने से पहले उसे साथ ले जाना शुरू कर दिया था: 1.7 मिलियन साल पुराना सबूत मिला
दक्षिण अफ्रीका की वंडरवर्क गुफा में रिसर्चर्स ने ऐसा सबूत खोजा है जो बताता है कि इंसान के पूर्वज 1.7 मिलियन साल पहले आग के साथ इंटरैक्ट कर रहे थे। इस खोज में जले हुए हड्डियों के टुकड़ों का एनालिसिस किया गया है, जो दिखाता है कि आग का इस्तेमाल इंसानों ने पूरी तरह से सीखने से पहले ही शुरू कर दिया था।
ये स्टडी *PLOS ONE* जर्नल में पब्लिश हुई है। पहले भी रिसर्च में वंडरवर्क गुफा को आग के इस्तेमाल की शुरुआत के डिस्कशन का सेंटर माना गया था। पहले की खोज में यहां आग के सबूत करीब 10 लाख साल पुराने बताए गए थे। लेकिन नई स्टडी ने इस टाइमलाइन को और पीछे खिसका दिया है, अब इसे 1.07 से 1.79 मिलियन साल पुराना माना जा रहा है।
जली हुई सामग्री उन लेयर्स में मिली है जो शुरुआती अचुलेन टूल्स से जुड़ी हैं। ये टूल्स आमतौर पर होमो इरेक्टस या उसके करीबी रिश्तेदारों से जुड़े होते हैं। खास बात ये है कि ये सबूत गुफा के अंदर 30 मीटर गहराई में मिले हैं, जहां प्राकृतिक झाड़ियों की आग या सूरज की रोशनी नहीं पहुंच सकती। इसका मतलब है कि ये आग बाहर की जंगल की आग से नहीं आई बल्कि इसे गुफा के अंदर लाया गया था।
इन जले हुए टुकड़ों की उम्र और नेचर पता करने के लिए रिसर्चर्स ने एक नया लुमिनेसेंस टेक्नीक इस्तेमाल किया। जब हड्डियों को खास तरह की रोशनी में रखा जाता है, तो वो हल्की चमक छोड़ती हैं, जो बताती है कि वो कब और कैसे गर्मी के संपर्क में आईं। ये नॉन-डिस्ट्रक्टिव मेथड है, जिससे छोटे टुकड़ों का एनालिसिस बिना उन्हें नुकसान पहुंचाए किया गया।
दिलचस्प बात ये है कि कई जली हुई हड्डियां उल्लू के पैलेट्स में मिलीं। ये पैलेट्स छोटे शिकार के कंप्रेस्ड अवशेष होते हैं, जिन्हें उल्लू गुफा में बैठकर बाहर निकालते हैं। चूंकि ये पैलेट्स इंसानी एक्टिविटी से नहीं बनते, इसलिए इनमें जले हुए टुकड़ों का होना बताता है कि आग गुफा में एक प्राकृतिक फैक्टर थी, ना कि बाद में इंसानों ने इसे वहां लाया।
गुफा के अंदर बार-बार जलने की घटनाओं के सबूत मिले हैं, ना कि एक बार की घटना। गुफा में गुआनो लेयर (चमगादड़ों की बीट) नहीं मिली, जो बताती कि आग खुद से लगी हो। ये सबूत दर्शाते हैं कि आग गुफा में बाहर से लाई गई थी, ना कि अंदर खुद से लगी हो। रिसर्चर्स का मानना है कि शुरुआती इंसान जंगली आग या बिजली गिरने से जलते हुए कोयले या धुएं वाली सामग्री को इकट्ठा कर गुफा में लाते थे।
इसका मतलब ये नहीं है कि शुरुआती इंसान आग बनाना सीख चुके थे। बल्कि ये दिखाता है कि वो आग के साथ एक बेसिक इंटरैक्शन कर रहे थे—उसे लाना और समय-समय पर संभालना, जो उनके माहौल पर निर्भर करता था।
ये खोज अचुलेन पीरियड से मेल खाती है, जो इंसानी विकास का वो दौर था जब टूल्स बनाने में सुधार और खानपान व मूवमेंट में बदलाव हो रहे थे। उस समय आग के इस्तेमाल पर अभी भी बहस जारी है, लेकिन वंडरवर्क गुफा से मिले सबूत बताते हैं कि शुरुआती इंसान आग की संभावनाओं को एक्सप्लोर कर रहे थे। गुफा में आग का होना उनके जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित कर सकता था, जैसे खाना बनाना, रात में एक्टिविटी करना, और इसे बनाए रखने की चुनौती।
ये खोज हमारे शुरुआती इंसानी व्यवहार को समझने में एक नया आयाम जोड़ती है। ये दिखाती है कि आग को पूरी तरह से काबू करने की यात्रा सावधानी और मौके का फायदा उठाने से शुरू हुई थी, ना कि सीधे कंट्रोल से।
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