ट्रंप-ईरान MoU से हालात पुराने जैसे हुए, लेकिन कुछ अहम बदलाव हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच साइन हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) ने संघर्ष से पहले की स्थिति को बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। हालांकि, इसमें कुछ अहम मुद्दे छूट गए हैं।
ये 14-पॉइंट MoU अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले रविवार को अपने 80वें जन्मदिन पर और फिर गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित डिनर के दौरान साइन किया। इस समझौते में अगले 60 दिनों के लिए आगे की बातचीत का खाका तैयार किया गया है।
भले ही ईरान ने वर्साय में हुए साइनिंग समारोह में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन मीडिया में लीक होने के बाद उसने MoU का टेक्स्ट जारी कर दिया।
इस समझौते में दोनों पक्षों की कुछ अहम शर्तें शामिल हैं: ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है, जबकि अमेरिका ने अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और 30 दिनों के भीतर होरमुज जलडमरूमध्य के जरिए पूरी शिपिंग क्षमता बहाल करने का वादा किया है।
इसके अलावा, अमेरिका ईरानी कच्चे तेल के निर्यात और अन्य सेवाओं के लिए छूट देगा। MoU में सभी मोर्चों पर तुरंत और स्थायी युद्धविराम की बात कही गई है, जिसमें लेबनान भी शामिल है। इसमें दोनों देशों के बीच बल प्रयोग की धमकी पर भी रोक लगाई गई है।
दोनों पक्ष ईरान के संवर्धित परमाणु सामग्री के भविष्य पर चर्चा करेंगे, और अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी।
हालांकि, MoU में दो अहम मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं की गई है: ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को उसका समर्थन। इन मुद्दों को लेकर आलोचना हो रही है और यह आगामी बातचीत में फिर से उभर सकते हैं, खासकर रिपब्लिकन, इज़राइल और खाड़ी देशों के दबाव के चलते।
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