देश में वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 1.46 करोड़ यूनिट रक्त एकत्र किया गया, जो राष्ट्रीय आवश्यकता के बराबर है। यह आंकड़ा पहली नजर में राहत देने वाला लगता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।
पर्याप्त रक्त होने के बावजूद, सही ब्लड ग्रुप का खून सही समय पर जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस समस्या को स्वास्थ्य विशेषज्ञ ‘ब्लड डेजर्ट’ यानी रक्त-वंचित क्षेत्र कहते हैं। बीएमजे ग्लोबल हेल्थ के एक अध्ययन में इस समस्या पर गहराई से नजर डाली गई।
इस अध्ययन में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का विश्लेषण किया गया। इन राज्यों को एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप (ईएजी) के तहत रखा गया है।
रिपोर्ट में यह पाया गया कि इन राज्यों की बड़ी आबादी ऐसे इलाकों में रहती है, जहां ब्लड बैंक तक पहुंचने में एक घंटे से ज्यादा का समय लगता है। इसका मतलब है कि इन इलाकों में ब्लड बैंक की कमी के कारण जरूरतमंद मरीजों को समय पर खून नहीं मिल पाता।
यह समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब किसी मरीज को तुरंत खून की जरूरत होती है। इन राज्यों में ब्लड बैंक की कमी और उनकी पहुंच में बाधा के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब देश में रक्त संग्रहण की मात्रा राष्ट्रीय आवश्यकता के बराबर है।
लेकिन ब्लड बैंक तक पहुंच की कमी और सही समय पर सही ब्लड ग्रुप का खून उपलब्ध न हो पाना एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
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