उडुपी में आयुर्वेद पांडुलिपियों पर वर्कशॉप शुरू

उडुपी, कर्नाटक में आज से 15 दिन की वर्कशॉप शुरू हुई जिसमें तिगलारी और पुरानी कन्नड़ लिपियों में लिखी आयुर्वेद पांडुलिपियों को ट्रांसलिटरेट करने पर काम होगा। इसे CCRAS और सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी ने आयोजित किया है ताकि भारत की पारंपरिक ज्ञान धरोहर को संरक्षित किया जा सके।

आयुर्वेद और संस्कृत के छात्र इसमें हिस्सा ले रहे हैं। यह वर्कशॉप श्री पुथिगे नरसिंह सभाभवन में हो रही है और इसे श्री वादिराजा रिसर्च फाउंडेशन का सहयोग मिला है। श्री पुथिगे मठ के संतों ने इसे आशीर्वाद दिया है। CCRAS के डायरेक्टर जनरल प्रो.

वैद्य रबिनारायण आचार्य ने इसका उद्घाटन किया और ज्ञान भारतम मिशन के तहत आयुर्वेद ज्ञान को संरक्षित करने की सरकार की कोशिशों पर जोर दिया। यह CCRAS और CSU की तीसरी वर्कशॉप है। इससे पहले ओडिशा और केरल में अन्य क्षेत्रीय लिपियों पर वर्कशॉप हो चुकी हैं।

प्रतिभागी पांडुलिपियों को पढ़ने, ट्रांसलिटरेट करने और एडिट करने पर काम करेंगे ताकि उन्हें प्रकाशित किया जा सके। स्थानीय आयुर्वेद कॉलेजों और संस्कृत संस्थानों के छात्र इसमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

इस कार्यक्रम से कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा तक पहुंच बढ़ेगी। सरकार की प्राचीन भारतीय ज्ञान को संरक्षित और प्रचारित करने की प्रतिबद्धता इस पहल में दिखती है। मुख्य बातें - उडुपी में 15 दिन की आयुर्वेद वर्कशॉप शुरू हुई।

- CCRAS और सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी ने आयोजन किया। - तिगलारी और पुरानी कन्नड़ लिपियों पर काम होगा। - पांडुलिपियों को प्रकाशित करने की तैयारी होगी। - तीसरी वर्कशॉप; पहले ओडिशा और केरल में हुई थी। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल उडुपी वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य क्या है?

तिगलारी और पुरानी कन्नड़ लिपियों में लिखी आयुर्वेद पांडुलिपियों को ट्रांसलिटरेट करना। वर्कशॉप का आयोजन कौन कर रहा है? CCRAS और सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी ने श्री वादिराजा रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से आयोजन किया। स्रोत: Press Information Bureau (Govt.

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