बंगाल सरकार ने बऊबाजार ब्लास्ट के दोषी की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की

बऊबाजार ब्लास्ट: दोषी की जल्दी रिहाई के खिलाफ बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची पश्चिम बंगाल सरकार ने 1993 के बऊबाजार ब्लास्ट मामले में दोषी मोहम्मद राशिद खान की जल्दी रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने खान की समय से पहले रिहाई का आदेश दिया था, जिसे राज्य सरकार ने चुनौती दी है। इस ब्लास्ट में कोलकाता के भीड़भाड़ वाले इलाके में 69 लोगों की जान गई थी। राज्य सरकार के वकील ने इस मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस वी.

मोहना की बेंच के सामने इस मामले को उठाया। उन्होंने सोमवार, 22 जून को सुनवाई की मांग की। चीफ जस्टिस ने कहा कि इस पर विचार किया जाएगा। मोहम्मद राशिद खान को 31 अगस्त 2001 को इंडियन पीनल कोड, एक्सप्लोसिव्स एक्ट और टाडा (TADA) के तहत दोषी ठहराया गया था।

16 मार्च 1993 को हुए इस ब्लास्ट का मास्टरमाइंड खान को माना गया था। राज्य की सजा समीक्षा बोर्ड (SSRB) ने खान की रिहाई के खिलाफ सिफारिश की थी, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने 5 जून को उसकी रिहाई का आदेश दिया।

77 साल के खान ने अपनी रिहाई के लिए दलील दी थी कि वह 33 साल से जेल में हैं और उनकी सेहत खराब है। उन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोतियाबिंद जैसी बीमारियां हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ दोषी ठहराए गए पन्नालाल जयसोरा को मार्च 2014 में ही रिहा कर दिया गया था।

राज्य सरकार ने तर्क दिया कि खान इस ब्लास्ट का मास्टरमाइंड था और उसकी रिहाई का विरोध किया। SSRB ने मार्च 2015 में उसकी रिहाई की सिफारिश की थी, लेकिन सितंबर 2015 में इस फैसले को पलट दिया।

यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद हुआ, जिसमें गंभीर अपराधों के मामलों में दोषियों को रिहा करने पर रोक लगाई गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने हालांकि, रिहाई के मामलों में सुधारात्मक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी।

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