ट्रंप का ईरान समझौता कमजोर, विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

ट्रंप का ईरान शांति का वादा, लेकिन विशेषज्ञों ने डील को बताया कमजोर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ हुई एक समझौता को बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है, लेकिन विशेषज्ञ इस डील की मजबूती और स्पष्टता को लेकर संदेह जता रहे हैं।

ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने समझौते का पालन नहीं किया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। उन्होंने कहा, "जब मैं स्थायी कहता हूं, तो इसका मतलब स्थायी होना चाहिए।

अगर ऐसा नहीं हुआ, तो उन्हें बम से उड़ा दिया जाएगा।" यह समझौता 14-पॉइंट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) के तहत तैयार किया गया है, जिसे रविवार को घोषित किया गया और बुधवार को इसकी शर्तें सार्वजनिक की गईं। ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्होंने ईरानी वार्ताकारों को सख्त अल्टीमेटम दिया था।

उन्होंने कहा, "मैंने उनसे कहा, 'अगर आप इस समझौते का पालन नहीं करेंगे, तो हम आपको बुरी तरह बम से उड़ा देंगे।'" डील के मुख्य प्रावधानों में सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकना शामिल है, जिसमें लेबनान भी शामिल है।

इसके अलावा, दोहरे नाकेबंदी को हटाने और ईरान द्वारा टोल लगाने के किसी भी दावे को छोड़ने पर सहमति बनी है। साथ ही, ईरान को कम से कम 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर की जब्त की गई राशि वापस करने के प्रयास किए जाएंगे।

हालांकि यह समझौता तनाव कम करने की दिशा में बड़े कदम का वादा करता है, इसके लागू होने और दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर सवाल बने हुए हैं। विशेषज्ञों को इस डील से स्थायी शांति की संभावना पर संदेह है।

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