सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को RTI एक्टिविज्म पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अब नया बिजनेस बन गया है। यह मामला RTI कार्यकर्ता राकेश बेहल और उसके सहयोगी राजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा था।
दोनों पर पंजाब के गुरदासपुर में सड़क निर्माण कार्य में बाधा डालने और मजदूरों को डराने-धमकाने के आरोप हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई शामिल थे, ने कहा, 'आप कौन होते हैं इन सड़कों के निर्माण की निगरानी करने वाले?
आपको ये अधिकार किसने दिए हैं?' कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 14 मई को दोनों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। RTI एक्टिविज्म का मकसद सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को उजागर करना है।
हालांकि, हाल के दिनों में इसके गलत इस्तेमाल के मामले भी सामने आए हैं। दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल भी RTI एक्टिविस्ट रहे हैं और उन्हें 2006 में रेमन मैगसेसे पुरस्कार मिला था। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को PIL (जनहित याचिका) पर भी टिप्पणी की थी।
कोर्ट ने कहा कि PIL अब प्राइवेट इंटरेस्ट, पैसा इंटरेस्ट और पॉलिटिकल इंटरेस्ट लिटिगेशन बन गई हैं। कोर्ट ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन की 2006 की PIL पर सवाल उठाया, जिसमें सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि PIL का गलत इस्तेमाल हो रहा है।
मुख्य बातें - सुप्रीम कोर्ट ने RTI एक्टिविज्म को नया बिजनेस बताया। - राकेश बेहल और राजीव कुमार की जमानत याचिका खारिज हुई। - दोनों पर गुरदासपुर में सड़क निर्माण में बाधा डालने का आरोप है। - सुप्रीम कोर्ट ने PIL के गलत इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।
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