नींद की कमी का असर सिर्फ आपकी थकान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर को अंदर से तेजी से बूढ़ा भी बना सकती है। एक बड़े अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि कम या ज्यादा नींद लेने से शरीर के कई अंगों और सिस्टम्स में तेज बायोलॉजिकल एजिंग के संकेत दिखते हैं।
यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल *नेचर* में प्रकाशित हुई है और इसमें करीब पांच लाख यूके बायोबैंक प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण किया गया है।
रिसर्च के मुताबिक, नींद के दौरान हमारा दिमाग दिनभर का वेस्ट क्लियर करता है, हार्मोन रीसेट होते हैं, इम्यून सिस्टम में बदलाव आते हैं, मेटाबॉलिज्म संतुलित होता है और शरीर के टिशू रिपेयर के प्रोसेस से गुजरते हैं।
लेकिन जब नींद पूरी नहीं होती या बहुत ज्यादा होती है, तो ये प्रक्रियाएं गड़बड़ा जाती हैं, जिससे शरीर के अंगों पर दीर्घकालिक असर पड़ता है।
अध्ययन में पाया गया कि नींद की कमी या जरूरत से ज्यादा सोने वाले लोगों में दिल, दिमाग और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों में उम्र बढ़ने के संकेत तेज़ी से दिखे। यह असर सिर्फ बाहरी लक्षणों तक सीमित नहीं था, बल्कि मॉलिक्यूलर स्तर पर भी बदलाव देखे गए।
यह रिसर्च इस बात पर जोर देती है कि अच्छी सेहत के लिए न सिर्फ पर्याप्त बल्कि संतुलित नींद लेना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि 7-8 घंटे की नियमित नींद शरीर को रिपेयर और रीसेट करने का सबसे सही तरीका है।
लंबे समय तक खराब नींद न सिर्फ आपकी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है, बल्कि गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकती है। तो अगली बार जब आप नींद को हल्के में लें, तो याद रखें कि यह सिर्फ आराम का जरिया नहीं, बल्कि आपके शरीर को स्वस्थ और युवा बनाए रखने का एक अहम हिस्सा है।
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