पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी के एक बागी गुट ने दावा किया है कि उन्हें विधानसभा में 59 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इस गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा कर रहे हैं।
इन नेताओं ने ममता बनर्जी को अपना नेता मानते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को खुली चुनौती दी है। बागी गुट ने खुद को 'असली' तृणमूल कांग्रेस करार दिया है। उनका आरोप है कि पार्टी का आधिकारिक नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं को दरकिनार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि उनका गुट पार्टी की असली भावना और मूल विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है। 59 विधायकों के समर्थन का दावा तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों को बदलने की क्षमता रखता है। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व की ओर से इस दावे पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते सत्ता संघर्ष को उजागर करता है। पार्टी के अंदर विभिन्न गुट प्रभाव और नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है और दोनों पक्षों से आगे की प्रतिक्रियाओं और कदमों का इंतजार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का असर पार्टी की छवि और विधानसभा में उसके प्रदर्शन पर पड़ सकता है। अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या यह विवाद किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है।
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