भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बताया कि 2025-26 की चौथी तिमाही में लिस्टेड प्राइवेट नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों की बिक्री में 13.9% की सालाना बढ़त हुई, जो पिछली तिमाही के 10.1% से ज्यादा है।
यह डेटा 3,266 कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर आधारित है और मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और नॉन-आईटी सर्विस सेक्टर में ग्रोथ दिखाता है। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बिक्री में 14.5% की बढ़त हुई, जिसमें ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और नॉन-फेरस मेटल्स इंडस्ट्री का बड़ा योगदान रहा।
आईटी कंपनियों ने 9.9% और नॉन-आईटी सर्विस कंपनियों ने 20.3% की बढ़त दर्ज की, जिसमें होलसेल और रिटेल ट्रेड का अहम रोल रहा। हालांकि, कच्चे माल की लागत बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर असर पड़ा। इनकी लागत 18.3% बढ़ी और कच्चे माल का बिक्री अनुपात 58.5% तक पहुंच गया।
मैन्युफैक्चरिंग में स्टाफ खर्च 9.8% की धीमी दर से बढ़ा, जबकि नॉन-आईटी सर्विस में यह 8.9% बढ़ा। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 9.4% तक सीमित रहा, जबकि आईटी और नॉन-आईटी सर्विस कंपनियों ने क्रमशः 14.1% और 6.5% की बढ़त दर्ज की।
ब्याज कवरेज अनुपात मैन्युफैक्चरिंग में बेहतर हुआ, लेकिन नॉन-आईटी सर्विस में स्थिर रहा। RBI का यह डेटा प्राइवेट कॉर्पोरेट सेक्टर की परफॉर्मेंस और वित्तीय स्थिति पर गहरी जानकारी देता है। मुख्य बातें - प्राइवेट नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों की बिक्री Q4 में 13.9% बढ़ी।
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बिक्री 14.5% बढ़ी, मुख्य इंडस्ट्रीज ने योगदान दिया। - आईटी कंपनियों की बिक्री 9.9% और नॉन-आईटी सर्विस 20.3% बढ़ी। - मैन्युफैक्चरिंग में कच्चे माल की लागत 18.3% बढ़ी। - ऑपरेटिंग प्रॉफिट मैन्युफैक्चरिंग में घटा, लेकिन आईटी में बढ़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल Q4 2025-26 में प्राइवेट कंपनियों की बिक्री कितनी बढ़ी? बिक्री में 13.9% की सालाना बढ़त हुई, जो पिछली तिमाही के 10.1% से ज्यादा है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बिक्री किसने बढ़ाई? ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और नॉन-फेरस मेटल्स ने ग्रोथ में योगदान दिया।
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