झारखंड के भगैया सिल्क, कुचाई सिल्क, मुंडा ज्वेलरी और बांस के

झारखंड के भगैया सिल्क, कुचाई सिल्क, मुंडा ज्वेलरी और बांस से बनने वाले शिल्प उत्पादों को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिला है। यह टैग मिलने से इन उत्पादों को उनकी खास पहचान और गुणवत्ता के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) ने अपने बयान में कहा कि यह झारखंड के कारीगरों और बुनकरों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। NABARD ने बताया कि GI टैग मिलने से इन उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे कारीगरों और बुनकरों की आय में सुधार हो सकता है।

भगैया सिल्क, कुचाई सिल्क, मुंडा ज्वेलरी और बांस के शिल्प झारखंड की पारंपरिक कला और संस्कृति का हिस्सा हैं। इन उत्पादों को GI टैग मिलने से झारखंड के स्थानीय कारीगरों को अपने काम को और बेहतर तरीके से पेश करने का मौका मिलेगा।

GI टैग किसी उत्पाद को उसकी भौगोलिक पहचान और गुणवत्ता के आधार पर दिया जाता है। यह टैग मिलने से इन उत्पादों को नकली सामान से बचाने में भी मदद मिलेगी। झारखंड के इन चार उत्पादों को GI टैग मिलने से राज्य की हस्तशिल्प और बुनाई कला को नई पहचान मिली है।

यह झारखंड के कारीगरों और बुनकरों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें अपने काम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने में मदद करेगा।

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