भारत-यूके ट्रेड डील 15 जुलाई से लागू, सस्ती कारों और व्हिस्की पर टैरिफ कटौती

भारत-यूके ट्रेड डील 15 जुलाई से लागू: सस्ती कारों से लेकर व्हिस्की पर टैरिफ कटौती तक, 7 अहम बातें भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। यह समझौता दोनों देशों के व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव लाने की उम्मीद है।

इसका मकसद बाजार में पहुंच बढ़ाना, टैरिफ कम करना और सामान व सेवाओं में सहयोग को बढ़ाना है। इसमें टैरिफ कटौती, संवेदनशील सेक्टरों में कोटा आधारित पहुंच और प्रोफेशनल्स के लिए बेहतर मोबिलिटी प्रावधान शामिल हैं।

कस्टम्स नोटिफिकेशन और लागू करने की प्रक्रिया को समय पर तैयार करने की कोशिश की जा रही है ताकि समझौते के फायदों में कोई देरी न हो। अधिकारियों ने बताया है कि पहले दिन से भेजे गए सामान को इस समझौते के तहत प्राथमिकता मिलेगी।

बाजार में पहुंच का विस्तार CETA भारतीय निर्यातकों के लिए $500 बिलियन से ज्यादा का बाजार खोलने की उम्मीद है। सामान और सेवाओं में बेहतर पहुंच मिलेगी। भारत को मौजूदा व्यापार स्थितियों की तुलना में 7-10% टैरिफ लाभ मिलने की संभावना है।

99% से ज्यादा टैरिफ लाइन्स पर चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी खत्म की जाएगी। संवेदनशील सामान के लिए हाइब्रिड टैरिफ स्ट्रक्चर संवेदनशील सामान के लिए टैरिफ कटौती और मात्रा सीमा का हाइब्रिड स्ट्रक्चर लागू होगा।

ज्यादातर टैरिफ लाइन्स पर अंततः जीरो ड्यूटी होगी, लेकिन ऑटोमोटिव प्रोडक्ट्स जैसे सेक्टर को कोटा नियंत्रण में रखा जाएगा ताकि आयात पर नियंत्रण रखा जा सके। ऑटोमोटिव सेक्टर में प्रतिबद्धताएं भारत अगले 15 साल में यूके से 3.78 लाख पारंपरिक इंजन वाली पैसेंजर कारों के आयात की अनुमति देगा।

इस दौरान कुछ श्रेणियों पर आयात शुल्क 110% से घटाकर 10% किया जाएगा। इंजन साइज और वाहन श्रेणी के आधार पर अलग-अलग नियम लागू होंगे।

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