हिमाचल में हाउसलिस्टिंग शुरू, दो राज्यों में सेल्फ-एन्यूमरेशन

हिमाचल प्रदेश में हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना की फील्ड ऑपरेशन्स शुरू हो गई हैं, जबकि केरल और नागालैंड में सेल्फ-एन्यूमरेशन शुरू हो चुका है। ये गतिविधियां 2021 की जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जो COVID-19 महामारी के कारण देरी से शुरू हुई।

हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना, हर दस साल में होने वाली जनगणना प्रक्रिया का पहला और अहम कदम है। इसमें घरों की स्थिति, सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है। हिमाचल प्रदेश में अधिकारी घर-घर जाकर यह जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं।

वहीं, केरल और नागालैंड के लोग अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सेल्फ-एन्यूमरेशन कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया आसान और समावेशी हो गई है। जनगणना सरकार के लिए नीतियां बनाने का एक अहम साधन है। इससे संसाधनों का सही आवंटन और विकास योजनाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।

इस चरण में जुटाए गए डेटा से हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में कमियों की पहचान कर लक्षित सुधार किए जा सकेंगे। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे एन्यूमरेटर्स का सहयोग करें और इस प्रक्रिया में सक्रिय भाग लें।

पहली बार शुरू की गई सेल्फ-एन्यूमरेशन सुविधा से भागीदारी बढ़ने और लॉजिस्टिक चुनौतियां कम होने की उम्मीद है। यह 2021 की जनगणना प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत के विकास की योजना के लिए सटीक और व्यापक डेटा प्रदान करेगा।

मुख्य बातें - हिमाचल प्रदेश में हाउसलिस्टिंग जनगणना शुरू हुई। - केरल और नागालैंड में ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन शुरू। - COVID-19 महामारी के कारण जनगणना 2021 में देरी हुई। - जुटाया गया डेटा नीतियां बनाने और संसाधन आवंटन में मदद करेगा।

- सेल्फ-एन्यूमरेशन से भागीदारी बढ़ाने और चुनौतियां कम करने की उम्मीद। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल हाउसलिस्टिंग जनगणना का उद्देश्य क्या है? यह घरों की स्थिति, सुविधाओं और संपत्तियों का डेटा जुटाकर नीतियां बनाने और विकास योजना में मदद करता है। सेल्फ-एन्यूमरेशन कहां शुरू हुआ है?

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