PMKVY पर संसदीय समिति की नाराज़गी, ट्रेनिंग और बाज़ार की मांग में असंतुलन पर सवाल

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) को लेकर संसदीय समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) ने योजना के तहत ट्रेनिंग प्रोग्राम और बाज़ार की वास्तविक मांग के बीच असंतुलन पर चिंता व्यक्त की है।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्किलिंग प्रयास मुख्य रूप से ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित रहे हैं, जहां रोजगार की मांग अपेक्षाकृत कम है। इनमें परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिटेल जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

PAC ने सरकार से आग्रह किया है कि स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम को उद्योग की ज़रूरतों के हिसाब से तैयार किया जाए। समिति का मानना है कि यदि ट्रेनिंग प्रोग्राम को बाज़ार की मांग के अनुसार डिजाइन किया जाए, तो प्रशिक्षुओं को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

योजना का उद्देश्य युवाओं को उद्योग से जुड़े कौशल प्रदान करना है, लेकिन समिति ने इसके क्रियान्वयन में कई खामियों की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि सरकार योजना का पुनः मूल्यांकन करे और इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए कदम उठाए।

हालांकि, समिति की सिफारिशों और सरकार की प्रतिक्रिया पर अभी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह मुद्दा भारत में ट्रेनिंग और रोजगार के अवसरों के बीच की खाई को पाटने की चुनौती को उजागर करता है।

PMKVY का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना और उन्हें उद्योग से जुड़े कौशल प्रदान करना है। लेकिन PAC की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि योजना को लागू करने में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया।

अब यह देखना होगा कि सरकार इन सिफारिशों पर क्या कदम उठाती है और योजना को बाज़ार की मांग के अनुसार कैसे सुधारती है।

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