स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुष्ठ मुक्त भारत पर कार्यशाला आयोजित की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की, जिसका उद्देश्य कुष्ठ रोग मुक्त भारत की रणनीतियों को मजबूत करना था। इस कार्यशाला की अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) श्रीमती अराधना पटनायक ने की।

इसमें लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें राज्य स्वास्थ्य अधिकारी, डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञ और विकास साझेदार शामिल थे। भारत ने 2005 में राष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठ रोग को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने में सफलता पाई थी।

हालांकि, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश जैसे पांच उच्च प्राथमिकता वाले राज्यों में अभी भी संक्रमण जारी है, जो देश के कुल कुष्ठ रोग भार का लगभग 50% हिस्सा हैं। इन राज्यों में प्रचलन दर और बाल मामलों की संख्या अधिक है।

कार्यशाला में प्रमुख रणनीतियों पर चर्चा की गई, जिनमें नियमित मामलों की पहचान, सिंगल-डोज़ रिफैम्पिसिन (एसडीआर) के माध्यम से पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस का विस्तार और संपर्क ट्रेसिंग को तेज करना शामिल है।

विकलांगता रोकथाम और पुनर्वास प्रयासों पर भी जोर दिया गया, जिसमें 2025-26 में 1,500 से अधिक पुनर्निर्माण सर्जरी और स्व-देखभाल किट और विशेष जूते वितरित किए गए। कार्यशाला में साक्ष्य-आधारित योजना, सामुदायिक भागीदारी और कलंक कम करने पर जोर दिया गया।

जिला स्तर की चुनौतियों का समाधान करने के लिए राज्य-विशिष्ट कार्य योजनाएं तैयार की गईं। प्रतिभागियों ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकारों, तकनीकी संस्थानों और समुदायों के सहयोग से कुष्ठ रोग मुक्त भारत की दिशा में प्रगति तेज होगी।

कार्यशाला उच्च संक्रमण वाले जिलों में हस्तक्षेप बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुई। स्रोत: Press Information Bureau (Govt. of India) प्रेस विज्ञप्ति, 12 JUN 2026. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2272194

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