तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल का वॉकआउट: लोक भवन के बयान में आंकड़ों पर सवाल चेन्नई: तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने मंगलवार को विधानसभा में अपने संबोधन को छोड़कर बाहर चले जाने का जो नाटकीय कदम उठाया, उसने राजनीतिक और तथ्यात्मक बहस छेड़ दी है।
उनके बाहर जाने के तुरंत बाद लोक भवन की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ ने इस कदम को सही ठहराने की कोशिश की, लेकिन इसके दावों की जांच में कई गलतियां और आंकड़ों के चयनात्मक इस्तेमाल का पता चला है।
एफडीआई आंकड़ों में गड़बड़ी लोक भवन ने दावा किया कि तमिलनाडु, जो चार साल पहले विदेशी निवेश (FDI) पाने वाले राज्यों में चौथे स्थान पर था, अब छठे स्थान पर टिकने के लिए संघर्ष कर रहा है। लेकिन यह दावा गलत है।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-सितंबर के दौरान तमिलनाडु एफडीआई इक्विटी इनफ्लो में तीसरे स्थान पर था, जिसमें $3.5 बिलियन का निवेश हुआ।
वित्त वर्ष 2022 में राज्य चौथे स्थान पर था, जबकि वित्त वर्ष 2021 में छठे स्थान पर था। एमएसएमई आंकड़ों में विरोधाभास प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि तमिलनाडु में भारत के 5.5 करोड़ पंजीकृत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) में से 40 लाख हैं।
हालांकि, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 7.5 करोड़ पंजीकृत MSMEs हैं, जिनमें से 60 लाख तमिलनाडु में हैं। इस श्रेणी में राज्य राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर है।
आत्महत्या के आंकड़ों पर सवाल लोक भवन ने तमिलनाडु को "भारत की आत्महत्या राजधानी" बताया और एक साल में 20,000 आत्महत्याओं का दावा किया। लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2023 में महाराष्ट्र ने तमिलनाडु से ज्यादा आत्महत्याएं दर्ज कीं।
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