19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) में इंडस्ट्री के विशेषज्ञों ने कहा कि माइक्रो ड्रामा सिनेमा में एक नई कहानी विधा है, न कि कोई क्षणिक ट्रेंड। चर्चा में बताया गया कि छोटे और प्रभावशाली कंटेंट के जरिए यह फॉर्मेट आधुनिक दर्शकों को जोड़ने में सफल हो रहा है।
माइक्रो ड्रामा, जो आमतौर पर कम समय और केंद्रित कहानी पर आधारित होता है, हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और बदलती दर्शक प्राथमिकताओं के चलते लोकप्रिय हुआ है। MIFF में विशेषज्ञों ने कहा कि यह फॉर्मेट क्रिएटर्स को नए और अनोखे विचारों पर काम करने का मौका देता है।
इवेंट में यह भी कहा गया कि माइक्रो ड्रामा को 'फास्ट फैशन' कहना गलत है। इसे एक उभरती हुई कला विधा के रूप में देखा जाना चाहिए। यह फॉर्मेट अलग-अलग जॉनर और थीम्स के लिए उपयुक्त है और फिल्ममेकर्स को नई कहानी कहने की तकनीकें आज़माने का मौका देता है।
19वां MIFF, जो डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट और एनीमेशन फिल्मों का एक प्रतिष्ठित मंच है, रचनात्मक संवाद और नवाचार को बढ़ावा देता है। माइक्रो ड्रामा पर फोकस इस बात को दर्शाता है कि फेस्टिवल ग्लोबल फिल्म इंडस्ट्री के नए ट्रेंड्स को पहचानता है।
डिजिटल खपत बढ़ने के साथ, माइक्रो ड्रामा भविष्य की कहानी कहने की शैली में अहम भूमिका निभा सकता है। मुख्य बातें - 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में माइक्रो ड्रामा पर चर्चा हुई। - विशेषज्ञों ने इसे नई कहानी विधा बताया, न कि कोई क्षणिक ट्रेंड।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और दर्शकों की पसंद से यह फॉर्मेट लोकप्रिय हो रहा है। - इस फॉर्मेट की विविध जॉनर और थीम्स के लिए अनुकूलता पर जोर दिया गया। - MIFF ग्लोबल सिनेमा के नए ट्रेंड्स को पहचानने का मंच बना। स्रोत: Press Information Bureau (Govt. of India) प्रेस विज्ञप्ति, recent.
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2273532
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