क्या आप हेरिटेज साइट के पास घर बना सकते हैं? कानून क्या कहता है किसी ऐतिहासिक इमारत, जैसे सैकड़ों साल पुराने किले या शानदार महल के पास रहना किसी सपने जैसा लग सकता है। लेकिन इन हेरिटेज साइट्स के पास घर बनाना कड़े कानूनों के तहत आता है।
ये कानून भारत की पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए हैं। इससे जुड़े मुख्य कानून का नाम है 'प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958'। इस कानून में संरक्षित स्मारकों की सुरक्षा और पहचान बनाए रखने के लिए साफ गाइडलाइन्स दी गई हैं।
प्रतिबंधित क्षेत्र इस कानून की धारा 20ए के तहत, "प्रतिबंधित क्षेत्र" उस जगह को कहते हैं जो किसी संरक्षित स्मारक या साइट की सीमा से 100 मीटर तक फैली हो। इस क्षेत्र में निर्माण कार्य पूरी तरह से बैन है, सिवाय उन पुरातात्विक कामों के जो अधिकृत अधिकारियों द्वारा किए जाते हैं।
केंद्र सरकार के पास ये अधिकार है कि नेशनल मॉन्यूमेंट्स अथॉरिटी की सिफारिश पर इस 100 मीटर के दायरे को और बढ़ा सके। हालांकि, धारा 20सी के तहत, 16 जून 1992 से पहले बने भवन या संरचनाएं, या डायरेक्टर-जनरल की मंजूरी से बनाए गए निर्माण, इस नियम से छूट पा सकते हैं।
ऐसे प्रॉपर्टी मालिक मरम्मत, पुनर्निर्माण या रेनोवेशन के लिए अनुमति ले सकते हैं। नियंत्रित क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र के बाहर, कानून "नियंत्रित क्षेत्र" तय करता है, जो 200 मीटर और आगे तक फैला होता है।
इस क्षेत्र में किसी भी निर्माण, मरम्मत, पुनर्निर्माण या विकास कार्य के लिए पहले सक्षम प्राधिकरण से मंजूरी लेना जरूरी है।
लोग इस क्षेत्र में प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त, उत्तराधिकार या कब्जा कर सकते हैं, लेकिन जमीन पर किसी भी गतिविधि के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि इससे स्मारक की सुरक्षा, पहचान या ऐतिहासिक महत्व पर कोई असर न पड़े।
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