अमेरिकी शहर में पब्लिक बसों में फेसियल रिकग्निशन पर विवाद

अमेरिका के एक शहर में पब्लिक बसों में फेसियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी लगाने की योजना को लेकर विवाद शुरू हो गया है। इस फैसले ने प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का प्लान है कि इस टेक्नोलॉजी से रिकॉर्ड की गई वीडियो फुटेज को लोकल सर्वर पर पांच साल तक स्टोर किया जाएगा। इस योजना का मकसद बसों में सुरक्षा को बढ़ाना और क्राइम को रोकना बताया जा रहा है। लेकिन कई लोग इसे प्राइवेसी के लिए खतरा मान रहे हैं।

टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स और एक्टिविस्ट्स का कहना है कि फेसियल रिकग्निशन से लोगों की निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल हो सकता है। कुछ ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या इस डेटा को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।

दूसरी तरफ, ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का दावा है कि यह कदम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि फेसियल रिकग्निशन से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा और किसी भी घटना के बाद तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।

हालांकि, इस टेक्नोलॉजी के विरोध में कई स्थानीय संगठनों ने आवाज उठाई है। उनका कहना है कि बिना लोगों की सहमति के इस तरह की निगरानी करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। इस मुद्दे पर शहर में कई पब्लिक मीटिंग्स और बहसें हो रही हैं।

फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी इस योजना को लागू करती है या बढ़ते विरोध के चलते इसे वापस लेती है। इस विवाद ने टेक्नोलॉजी और प्राइवेसी के बीच संतुलन पर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है।

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