15 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में 2,000 मजदूरों को कानूनी जागरूकता ट्रेनिंग

चिक्कोडी: 15 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में 2,000 से ज्यादा मजदूरों को कानूनी जागरूकता की ट्रेनिंग का फायदा चिक्कोडी: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम करने वाले हजारों मजदूरों को अक्सर श्रम कानूनों, सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं की

जानकारी नहीं होती। इस कमी को दूर करने के लिए बेंगलुरु की संस्था एक्शनएड ने इलाके की कई ग्राम पंचायतों में 'वर्कर अवेयरनेस स्कूल' के जरिए ट्रेनिंग सेशन शुरू किए हैं।

पिछले एक महीने में ये सेशन यदूर, केरूर, नगरमुनोली, बेलकुड, करगांव, डोनवाड, बंबलवाड, मुगली, जैनापुर और कडापुर जैसे इलाकों में हुए हैं। इनका मकसद मजदूरों को उनके कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना है। एक्शनएड की टीम मजदूरों तक सीधे उनके काम की जगह पर पहुंचती है।

हर सेशन में 100 से 150 मजदूर हिस्सा लेते हैं। इनमें श्रम कानूनों और असंगठित मजदूरों की समस्याओं पर चर्चा होती है। अब तक 15 से ज्यादा ग्राम पंचायतों के 2,000 से ज्यादा मजदूर, जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल हैं, इन सेशनों का फायदा उठा चुके हैं।

एक्शनएड के सदस्यों ने बताया कि ऐसे जागरूकता प्रोग्राम मजदूर वर्ग की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। "हम मजदूरों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर खुश हैं," एक्शनएड के रिसोर्स पर्सन नामदेव हिरेकोडी ने कहा। स्थानीय लोग और प्रतिभागी भी इस पहल की तारीफ कर रहे हैं।

यदूर के रहने वाले अनिल कांबले ने कहा कि मनरेगा मजदूरों के शोषण को रोकने के लिए कानूनी जागरूकता बेहद जरूरी है। बेलकुड की मजदूर लक्ष्मी कब्बुरे ने उम्मीद जताई कि और भी संस्थाएं ऐसे प्रयास करेंगी।

एक्शनएड की यह पहल मजदूरों को उनके अधिकारों और सरकारी लाभों की जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए खूब सराही जा रही है।

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