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सर्वे में सिंगल पेरेंट्स के प्यार पर बच्चों का असर सामने आया

A survey reveals how single parents balance dating and family stability, showing children influence romantic choices and personal happiness.

Love Comes With a Pause Button for Single Parents, Survey Finds

प्यार पर सिंगल पेरेंट्स का 'पॉज बटन', सर्वे में खुलासा

सिंगल पेरेंट्स के लिए प्यार की नई शुरुआत करना आसान नहीं होता। हाल ही में हुए एक सर्वे में पता चला है कि बच्चों को रिश्तों में रुकावट नहीं माना जाता, लेकिन वे माता-पिता के डेटिंग करने, फैसले लेने और खुशियां महसूस करने के तरीके को जरूर प्रभावित करते हैं।

ये सर्वे 8,576 तलाकशुदा, अलग हुए और विधवा माता-पिता पर किया गया, जिनकी उम्र 28 से 50 साल के बीच थी। इसमें मेट्रो सिटी, छोटे शहर और कस्बों के लोग शामिल थे। सर्वे के मुताबिक, करीब 47% लोगों ने माना कि उनके बच्चे उनके रोमांटिक फैसलों में अहम लेकिन छुपा हुआ रोल निभाते हैं। सिंगल पेरेंट्स को अपनी इच्छाओं और परिवार की स्थिरता के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

सर्वे में सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि सिंगल पेरेंट्स को डर रहता है कि अपनी खुशी तलाशने से उनके बच्चों के लिए बनाए गए सुरक्षित माहौल पर असर पड़ सकता है। आधे से ज्यादा सिंगल मांओं और करीब आधे सिंगल पिताओं ने माना कि उन्होंने सही समय या परिवार पर असर के डर से कई अच्छे रिश्ते छोड़ दिए।

दिलचस्प बात ये है कि ये फैसले अक्सर बच्चों के विरोध के बजाय माता-पिता की खुद की चिंताओं की वजह से लिए गए। 70% लोगों ने कहा कि उन्होंने अपने डर के चलते रिश्तों पर दोबारा सोचा। मेट्रो और छोटे शहरों के करीब एक-तिहाई पेरेंट्स ने माना कि बच्चों के व्यवहार में छोटे बदलाव—जैसे ज्यादा सवाल पूछना या चुप हो जाना—को वे संकेत मानते हैं कि उन्हें अपने रिश्तों पर फिर से विचार करना चाहिए, भले ही ये बदलाव सामान्य हों।

सर्वे में ये भी सामने आया कि डेटिंग के दौरान सिंगल पेरेंट्स अपनी पर्सनैलिटी बदल लेते हैं। 30 से 45 साल के करीब 49% लोगों ने माना कि वे खुद को सेंसर करते हैं। वे खुद को सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने परिवार का प्रतिनिधि मानते हैं। इस वजह से वे अपनी स्वाभाविकता और एडवेंचर को दबा देते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं उन्हें गैर-जिम्मेदार पेरेंट न समझा जाए। गिल्ट की भावना भी इनमें आम है।

बच्चों के नजरिए को लेकर भी पेरेंट्स में चिंता दिखी। टियर I, II और III शहरों के 41% लोगों ने कहा कि रिश्तों में खुशी के पल भी बच्चों की प्रतिक्रिया को लेकर चिंता के साथ आते हैं। 60% को डर था कि उनका नया पार्टनर बच्चों के दूसरे पेरेंट की जगह ले सकता है। वहीं, कुछ को लगता है कि अपनी खुशी को प्राथमिकता देने से उनकी पेरेंटिंग जिम्मेदारियों पर असर पड़ सकता है।

अपने बच्चों को उपेक्षित महसूस कराने से बचने के लिए कई सिंगल पेरेंट्स ने माना कि वे जानबूझकर अपनी खुशी को कम दिखाते हैं और अपने रिश्तों को लो-की रखते हैं। ये सर्वे मैट्रिमोनी और मैचमेकिंग प्लेटफॉर्म 'रीबाउंस' ने किया, जो दिखाता है कि सिंगल पेरेंट्स को प्यार और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच कैसे संतुलन बनाना पड़ता है।

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