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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: उच्च योग्यता छिपाकर नौकरी पाना गलत, TET पास करना शिक्षकों के लिए अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कम योग्यता वाले पदों के लिए उच्च शैक्षणिक योग्यता छिपाना असली हकदारों से रोजगार छीनने जैसा है। साथ ही, शिक्षकों के लिए TET पास करना 2028 तक अनिवार्य कर दिया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कम योग्यता वाले पदों के लिए उच्च शैक्षणिक योग्यता छिपाना असली हकदारों से रोजगार छीनने जैसा है।

साथ ही, शिक्षकों के लिए TET पास करना 2028 तक अनिवार्य कर दिया गया है।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि कम शैक्षणिक योग्यता वाले पदों के लिए उच्च योग्यता छिपाकर नौकरी हासिल करना कानूनी रूप से गलत है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे पदों को कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए सुरक्षित रखना उचित है, क्योंकि वे अधिक शिक्षित उम्मीदवारों का मुकाबला नहीं कर सकते। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट के 2025 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री छिपाकर सिंडिकेट बैंक में अटेंडेंट की नौकरी हासिल की थी। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक रोजगार सभी योग्य उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों के तहत ही मिलना चाहिए। अधिक योग्यता होने का मतलब यह नहीं है कि किसी को कम योग्यता वाले पद पर नियुक्ति का स्वत: अधिकार मिल जाए।

एक अन्य फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करने की समय सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि TET पास करना शिक्षकों के लिए अनिवार्य है, क्योंकि इसकी अनुपस्थिति से आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस फैसले का असर देशभर में 20 लाख से अधिक शिक्षकों पर पड़ेगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया, जो राज्य सरकारों, शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत शिक्षकों द्वारा दाखिल की गई थीं। कोर्ट ने कहा कि 2028 के बाद इस समय सीमा को और नहीं बढ़ाया जाएगा। Read full story for details.