सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केसों के समयबद्ध निपटारे और अदालतों में अनियंत्रित स्थगन (एडजर्नमेंट) पर गाइडलाइंस बनाने की याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा कि वह वकीलों से टकराव नहीं चाहता।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केसों के समयबद्ध निपटारे और अदालतों में अनियंत्रित स्थगन (एडजर्नमेंट) पर गाइडलाइंस बनाने की याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा कि वह वकीलों से टकराव नहीं चाहता।

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम याचिका पर सुनवाई करते हुए केसों के समयबद्ध निपटारे और देशभर की अदालतों में अनियंत्रित स्थगन (एडजर्नमेंट) पर गाइडलाइंस बनाने की मांग को खारिज कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने इस याचिका पर कोई दिशा-निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान बेंच ने हल्के अंदाज में कहा कि वे वकीलों से टकराव नहीं चाहते और उन्हें अपना मित्र मानते हैं।
यह याचिका एक वकील द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने कोर्ट में खुद पेश होकर कहा कि उनका उद्देश्य अदालतों में अनियंत्रित स्थगन को नियंत्रित करने और केस फ्लो मैनेजमेंट पॉलिसी बनाने के लिए दिशा-निर्देश तय करना है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कोई आदेश जारी करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया था कि किसी भी मामले का फैसला तीन महीने के भीतर सुनाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि फैसलों में देरी से होने वाले नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। लेकिन इस याचिका पर कोर्ट ने कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया।
यह मामला न्यायिक प्रक्रियाओं में सुधार और वकीलों के साथ संबंधों के संतुलन को लेकर न्यायपालिका के दृष्टिकोण को दर्शाता है। Read full story for details.