भारत सरकार अगले एक महीने में कोयला गैसीफिकेशन आधारित यूरिया उत्पादन नीति पेश करने जा रही है।
इस कदम का मकसद प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करना, खाद उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और विदेशी मुद्रा बचाना है।
भारत सरकार अगले एक महीने में कोयला गैसीफिकेशन आधारित यूरिया उत्पादन नीति पेश करने जा रही है।
इस कदम का मकसद प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम करना, खाद उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और विदेशी मुद्रा बचाना है।

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भारत सरकार जल्द ही कोयला गैसीफिकेशन तकनीक पर आधारित यूरिया उत्पादन नीति पेश करने की तैयारी कर रही है। यह नीति अगले एक महीने में लागू होने की उम्मीद है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के विशाल कोयला भंडार का इस्तेमाल करके घरेलू यूरिया उत्पादन को बढ़ावा देना है, जो भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी है।
सरकार की इस पहल का मकसद खाद उत्पादन के लिए कच्चे माल में विविधता लाना और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है। कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के जरिए यूरिया उत्पादन से न केवल यूरिया की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि प्राकृतिक गैस के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा भी बचाई जा सकेगी।
इस नीति का ताल्लुक भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य से है, जिसमें आयात पर निर्भरता कम करने और देशी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस तकनीक को अपनाने से देश की कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, क्योंकि इससे खाद की लागत कम होगी और आपूर्ति में स्थिरता आएगी।
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। ऐसे में घरेलू संसाधनों का उपयोग करना आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। इस नीति से भारत की आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी और देश कृषि और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में संतुलन कायम कर सकेगा।