पेंच टाइगर रिजर्व में AI तकनीक ने कोर ज़ोन में अवैध मछली पकड़ने की गतिविधि पकड़ी।
एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे की तलाश जारी है।
यह टेक्नोलॉजी वन्यजीव संरक्षण और गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने में कारगर साबित हो रही है।
पेंच टाइगर रिजर्व में AI तकनीक ने कोर ज़ोन में अवैध मछली पकड़ने की गतिविधि पकड़ी।
एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे की तलाश जारी है।
यह टेक्नोलॉजी वन्यजीव संरक्षण और गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने में कारगर साबित हो रही है।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)
मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व में एक बार फिर AI तकनीक ने अपनी उपयोगिता साबित की है। यहां 'PAWS' (Protection and Alert for Wildlife Security) नामक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सर्विलांस सिस्टम ने कोर ज़ोन में अवैध मछली पकड़ने की गतिविधि का पता लगाया। इस घटना के बाद वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दूसरा व्यक्ति मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश अभी जारी है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, AI सिस्टम ने संवेदनशील इलाके में संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पहचान लिया और रियल टाइम में अलर्ट भेजा। इस अलर्ट के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। PAWS सिस्टम एडवांस्ड एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है, जो रिजर्व में होने वाली गतिविधियों की निगरानी और विश्लेषण करता है। इससे ऐसी घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने में मदद मिलती है।
पेंच टाइगर रिजर्व, जो बंगाल टाइगर समेत कई दुर्लभ वन्यजीवों का घर है, इस तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बना रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की तकनीकी पहल न केवल अवैध गतिविधियों को रोकती है, बल्कि संवेदनशील इकोसिस्टम की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाती है।
यह घटना वन्यजीव संरक्षण में AI के बढ़ते महत्व को दर्शाती है। पेंच टाइगर रिजर्व टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से भारत की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है।