Supreme Court Rules on Education, Employment, and Teacher Eligibility

The Supreme Court has issued key rulings on employment eligibility, teacher qualifications, and CBSE's language policy, emphasizing fairness and compliance with legal standards.

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The Supreme Court has issued key rulings on employment eligibility, teacher qualifications, and CBSE's language policy, emphasizing fairness and compliance with legal standards.

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि कम शैक्षणिक योग्यता के लिए आरक्षित पदों पर अपनी उच्च शिक्षा छिपाकर नौकरी हासिल करना असली हकदार से रोजगार छीनने जैसा है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के 2025 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें सिंडिकेट बैंक के अटेंडेंट पद के लिए ग्रेजुएशन की डिग्री छुपाने वाले व्यक्ति के पक्ष में निर्णय दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कुछ पदों को कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए सुरक्षित रखना सही है, क्योंकि वे ज्यादा पढ़े-लिखे उम्मीदवारों का मुकाबला नहीं कर सकते। सार्वजनिक रोजगार में सभी योग्य उम्मीदवारों को तय नियमों के तहत ही मौका मिलना चाहिए। सिर्फ अधिक पढ़ा-लिखा होने से किसी को कम योग्यता वाले पद पर नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करने की समयसीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। कोर्ट ने कहा कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा। बिना TET योग्यता वाले शिक्षक सेवा में बने रहे तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा पर पड़ेगा। इस फैसले से देश के 20 लाख से ज्यादा शिक्षकों पर असर पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE के थ्री-लैंग्वेज रूल पर भी सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि इस नीति के लागू होने से छात्रों और संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इस मामले में शिक्षकों और किताबों की कमी जैसी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए समीक्षा की जाएगी।