उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मीडिया को लेकर एक अहम संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि मीडिया का भारत के युवाओं की सोच और नजरिए को आकार देने में बड़ा प्रभाव है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, उन्होंने 'कॉकरोच' की मिसाल देकर समझाया कि गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के क्या परिणाम हो सकते हैं।
राधाकृष्णन ने कहा कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन मीडिया को अपनी रिपोर्टिंग में सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर कॉकरोच को रोल मॉडल के तौर पर दिखाया जाए, तो युवा उसे फॉलो करने लगेंगे।' इस बयान के जरिए उन्होंने मीडिया की जिम्मेदारी को रेखांकित किया और बताया कि समाज में मानकों को स्थापित करने में मीडिया की भूमिका कितनी अहम है।
उनके इस बयान के बाद प्रेस की आज़ादी और नैतिक पत्रकारिता के बीच संतुलन पर बहस छिड़ गई है। हालांकि, उन्होंने किसी खास मीडिया संस्थान या घटना का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को मीडिया जगत के लिए आत्ममंथन का आह्वान माना जा रहा है।
राधाकृष्णन ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की आज़ादी का समर्थन किया, लेकिन यह भी कहा कि इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।
उनकी 'कॉकरोच' वाली मिसाल को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ ने उनकी साफगोई की तारीफ की, तो कुछ ने इस मिसाल की उपयुक्तता पर सवाल उठाए। बावजूद इसके, उनके बयान ने मीडिया के सार्वजनिक राय और समाज के मूल्यों को प्रभावित करने वाली भूमिका पर चर्चा को फिर से जीवित कर दिया है।