अमेरिका रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को खत्म करने की योजना बना रहा है।
यह छूट मार्च में शुरू हुई थी और अब 17 जून को समाप्त हो सकती है।
इसका भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को खत्म करने की योजना बना रहा है।
यह छूट मार्च में शुरू हुई थी और अब 17 जून को समाप्त हो सकती है।
इसका भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)
अमेरिका रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को खत्म करने की तैयारी कर रहा है। यह छूट पहली बार मार्च में घोषित की गई थी और अब तक इसे दो बार बढ़ाया जा चुका है। ताजा विस्तार 17 जून को समाप्त हो रहा है। अगर यह छूट आगे नहीं बढ़ाई गई, तो भारत जैसे देशों को सस्ती ऊर्जा आपूर्ति में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
इस छूट के तहत भारत जैसे देशों को रूस से तेल खरीदने की अनुमति मिली थी, जो अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद जारी रही। लेकिन अब इस छूट के खत्म होने से भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश करनी पड़ सकती है या नए समझौतों पर बातचीत करनी होगी।
अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने इस फैसले के संभावित प्रभावों पर जोर दिया है। उनका कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और व्यापार के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। अमेरिका का यह निर्णय रूस पर ऊर्जा निर्यात पर निर्भरता कम करने की उसकी नीति के अनुरूप है।
भारत, जो रूस से तेल का बड़ा आयातक है, इस छूट पर काफी हद तक निर्भर रहा है। अगर यह छूट खत्म होती है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
17 जून की समय सीमा नजदीक आते ही इस फैसले पर और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है। भारत और अन्य प्रभावित देशों के लिए इसके परिणामों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। Read full story for details.