डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने 2015 की ईरान न्यूक्लियर डील का कड़ा विरोध किया था, अब एक सख्त समझौते की वकालत कर रहे हैं।
लेकिन चर्चा में आई नई ड्राफ्ट योजना में 2015 की डील से समानताएं दिख रही हैं।
डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने 2015 की ईरान न्यूक्लियर डील का कड़ा विरोध किया था, अब एक सख्त समझौते की वकालत कर रहे हैं।
लेकिन चर्चा में आई नई ड्राफ्ट योजना में 2015 की डील से समानताएं दिख रही हैं।

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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान 2015 की ईरान न्यूक्लियर डील का जोरदार विरोध किया था, अब एक सख्त और कड़े समझौते की मांग कर रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, जो ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) इस समय चर्चा में है, उसमें 2015 की डील से कई समानताएं नजर आ रही हैं।
2015 की यह डील, जिसे जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) के नाम से जाना जाता है, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की विदेश नीति की एक अहम उपलब्धि मानी जाती थी। ट्रंप ने 2018 में इस समझौते से अमेरिका को बाहर कर दिया था, इसे ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने में नाकाम और कमजोर बताते हुए। अब, जब एक नई योजना पर बातचीत चल रही है, तो इसे लेकर 2015 की डील से तुलना की जा रही है।
हालांकि, इस ड्राफ्ट MoU के बारीक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन इसमें दिख रही समानताओं ने बहस छेड़ दी है कि क्या यह प्रस्ताव ट्रंप के ईरान पर सख्त रुख के अनुरूप है। विशेषज्ञ इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि यह संभावित समझौता 2015 की डील से कितना अलग या समान होगा।
ईरान के साथ बातचीत की यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और घरेलू राजनीतिक दबावों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को भी उजागर करती है। जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ रही है, इस ड्राफ्ट MoU की शर्तों पर और अधिक स्पष्टता का इंतजार किया जा रहा है। Read full story for details.