तेलंगाना का ग्रेनाइट उद्योग, जो कभी राज्य की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता था, अब गहरे संकट में है। निर्यात बाजारों में लगातार गिरावट और कच्चे माल व मशीनरी की बढ़ती लागत ने इस उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। खासतौर पर करीमनगर और खम्मम जिलों में, जहां ग्रेनाइट उत्पादन का बड़ा हिस्सा होता है, खदान मालिक, फैक्ट्री संचालक और प्रवासी मजदूर इस मंदी से जूझ रहे हैं।
'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग में लंबे समय से जारी इस गिरावट ने सभी संबंधित पक्षों के लिए चिंता बढ़ा दी है। एक समय पर जो निर्यात इस उद्योग की आय का मुख्य स्रोत था, वह अब घटता जा रहा है। इसके साथ ही, उत्पादन लागत में लगातार हो रही वृद्धि ने कारोबारियों पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।
तेलंगाना का ग्रेनाइट उद्योग न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान देता था, बल्कि बड़ी संख्या में मजदूरों, खासकर प्रवासी श्रमिकों को रोजगार भी प्रदान करता था। लेकिन मौजूदा आर्थिक संकट के चलते खदानों और फैक्ट्रियों में गतिविधियां कम हो गई हैं, जिससे कई लोगों की आजीविका पर असर पड़ा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उद्योग को स्थिर करने और निर्यात बाजारों को फिर से मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हो रही है।
तेलंगाना के ग्रेनाइट उद्योग में आई इस गिरावट का असर न केवल रोजगार पर पड़ा है, बल्कि क्षेत्रीय विकास पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। Read full story for details.