जून 2025 से मई 2026 के बीच तमिलनाडु को बिलिगुंडलू पर लगभग 330 टीएमसी फीट कावेरी जल मिला, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा संशोधित 177.25 टीएमसी फीट के निर्धारित मानक से काफी अधिक है।
तमिलनाडु को एक और साल मिला कावेरी जल का अधिशेष
जून 2025 से मई 2026 के बीच तमिलनाडु को बिलिगुंडलू पर लगभग 330 टीएमसी फीट कावेरी जल मिला, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा संशोधित 177.25 टीएमसी फीट के निर्धारित मानक से काफी अधिक है।
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तमिलनाडु ने जून 2025 से मई 2026 के बीच कावेरी नदी से जल अधिशेष दर्ज किया है। बिलिगुंडलू पर राज्य को लगभग 330 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी फीट) पानी प्राप्त हुआ, जो कावेरी जल विवाद ट्रिब्यूनल के 2007 के अंतिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट के 2018 के संशोधन में निर्धारित 177.25 टीएमसी फीट से लगभग दोगुना है। यह लगातार दूसरा साल है जब तमिलनाडु को कावेरी जल का अधिशेष मिला है।
इस जल अधिशेष का तमिलनाडु की कृषि और अन्य आवश्यकताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। राज्य में सिंचाई और जल संसाधन प्रबंधन के लिए यह अतिरिक्त पानी नई संभावनाएं खोल सकता है। कावेरी जल विवाद ट्रिब्यूनल का अंतिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट का संशोधन कावेरी बेसिन के राज्यों के बीच जल वितरण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तमिलनाडु को लगातार मिल रहे जल अधिशेष से यह स्पष्ट होता है कि राज्य को जल संसाधन प्रबंधन और राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता है। हालांकि, इस विकास से जुड़े दीर्घकालिक प्रभावों का विश्लेषण अभी बाकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अधिशेष जल का सही उपयोग तमिलनाडु के कृषि क्षेत्र को और अधिक सशक्त बना सकता है। इसके साथ ही, यह जल वितरण और प्रबंधन में अन्य राज्यों के साथ समन्वय की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि तमिलनाडु इस अधिशेष जल का उपयोग कैसे करता है और यह राज्य की जल नीति और कृषि योजनाओं को किस तरह प्रभावित करता है। Read full story for details.
