सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा तय करने के लिए 5 सदस्यीय समिति बनाई

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत श्रृंखला की सीमा तय करने के लिए 5 सदस्यीय समिति गठित की है। इस समिति की अध्यक्षता भारतीय वन अनुसंधान और शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक कंचन देवी करेंगी। समिति को 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत श्रृंखला की सीमा तय करने के लिए 5 सदस्यीय समिति गठित की है।

इस समिति की अध्यक्षता भारतीय वन अनुसंधान और शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक कंचन देवी करेंगी।

समिति को 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)

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सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत श्रृंखला की सीमा को स्पष्ट करने के लिए एक 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता भारतीय वन अनुसंधान और शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक कंचन देवी करेंगी, जो इस समिति की पदेन अध्यक्ष होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति को 31 अगस्त, 2023 तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है और इसका पर्यावरणीय और भौगोलिक महत्व अत्यधिक है। इस क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उठाया है। समिति का मुख्य कार्य अरावली की परिभाषा को स्पष्ट करना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण और नीतिगत निर्णयों में इसे सही तरीके से शामिल किया जा सके।

यह निर्णय न्यायपालिका द्वारा पर्यावरण और भौगोलिक चुनौतियों को विशेषज्ञों की मदद से हल करने की पहल को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की राय इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हालांकि, समिति के कार्यक्षेत्र और कार्यप्रणाली से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण और प्रबंधन के लिए यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। समिति की रिपोर्ट का उपयोग भविष्य में इस क्षेत्र के पर्यावरणीय और भौगोलिक मुद्दों को हल करने के लिए किया जा सकता है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए बल्कि नीतिगत निर्णयों को सटीक और प्रभावी बनाने के लिए भी अहम है। Read full story for details.