शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कन्नौज में चौराहे पर रात बिताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके ठहरने की व्यवस्था को बाधित किया।
प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संतों का सम्मान उनकी प्राथमिकता है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कन्नौज में चौराहे पर रात बिताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके ठहरने की व्यवस्था को बाधित किया।
प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संतों का सम्मान उनकी प्राथमिकता है।

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, जो 81 दिनों की 'गविष्टि यात्रा' पर हैं, ने बुधवार रात कन्नौज के पाल चौराहे पर बिताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके रात्रि विश्राम की योजना को बाधित किया। शंकराचार्य का कहना है कि उन्हें छिबरामऊ के एक स्कूल में ठहरना था, लेकिन प्रशासन ने स्कूल प्रबंधक को धमकी दी कि अगर उन्हें वहां रुकने दिया गया तो बुलडोजर चलाया जाएगा। इसके चलते उन्होंने सरकारी जमीन पर रुकने का फैसला किया।
शंकराचार्य ने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य गाय को 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिलाना है। उन्होंने बताया कि वह अब तक 150 विधानसभाओं में जा चुके हैं और उनकी यात्रा यूपी की सभी 402 विधानसभाओं से होकर गुजरेगी। बुधवार शाम 7 बजे कन्नौज पहुंचने के बाद, उन्होंने चौराहे पर टेंट लगाकर रुकने का निर्णय लिया। भीषण गर्मी और बिजली की कमी के बावजूद उनके अनुयायियों ने हाथ वाले पंखों से उन्हें हवा दी। बाद में टेंट में कूलर और लाइट की व्यवस्था की गई।
कन्नौज के डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन ने शंकराचार्य की सुरक्षा के लिए पूरी व्यवस्था की थी और उन्हें कहीं रुकने से नहीं रोका गया। वहीं, स्कूल के मालिक मिलन दीक्षित ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि धर्मगुरु को ठहराने के लिए प्रशासनिक अनुमति लेनी पड़ती है। इस कारण उन्हें शंकराचार्य के कार्यक्रम को रोकना पड़ा।
शंकराचार्य ने गुरुवार सुबह अपनी यात्रा को फर्रुखाबाद की ओर बढ़ाया। उनकी यात्रा 3 मई को काशी से शुरू हुई थी और इसमें करीब 25 अनुयायी उनके साथ चल रहे हैं। Read full story for details.