2024 में भारत के आधे से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जेलों में कैदियों की संख्या उनकी क्षमता से अधिक रही।
मामूली क्षमता वृद्धि के बावजूद यह समस्या बनी हुई है।
2024 में भारत के आधे से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जेलों में कैदियों की संख्या उनकी क्षमता से अधिक रही।
मामूली क्षमता वृद्धि के बावजूद यह समस्या बनी हुई है।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)
भारत की जेलों में कैदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे जेलों में भीड़भाड़ की समस्या गंभीर होती जा रही है। *The Hindu* की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में देश के आधे से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जेलों में कैदियों की संख्या उनकी क्षमता से अधिक रही। हालांकि जेलों की क्षमता में मामूली वृद्धि हुई है, लेकिन यह बढ़ती संख्या को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जेलों में भीड़भाड़ का मुख्य कारण अंडरट्रायल कैदियों की बड़ी संख्या है। ये कैदी जेलों में बंद कुल कैदियों का एक बड़ा हिस्सा हैं। अंडरट्रायल कैदियों का लंबे समय तक जेल में रहना न केवल न्याय प्रक्रिया में देरी को दर्शाता है, बल्कि जेलों पर अतिरिक्त दबाव भी डालता है।
जेलों में बढ़ती भीड़भाड़ से वहां की जीवनशैली, स्वच्छता, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर असर पड़ता है। कैदियों को पर्याप्त जगह, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना जेल प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
हालांकि रिपोर्ट में उन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों का विवरण नहीं दिया गया है जहां स्थिति सबसे अधिक गंभीर है, लेकिन यह स्पष्ट है कि देश की जेल व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है। यह समस्या जेलों के प्रबंधन और सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंडरट्रायल कैदियों की संख्या को कम करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने और वैकल्पिक उपायों जैसे जमानत या अन्य गैर-हिरासत विकल्पों पर विचार करना जरूरी है। इसके साथ ही, जेलों की बुनियादी संरचना को सुधारने और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप की सख्त जरूरत है।
यह रिपोर्ट देश की जेल व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। Read full story for details.