केरल में मानसून 4 जून को पहुंचा, जो IMD की 1 जून की भविष्यवाणी से तीन दिन देरी से है।
यह 2015 के बाद पहली बार है जब IMD की भविष्यवाणी तय सीमा से बाहर रही।
केरल में मानसून 4 जून को पहुंचा, जो IMD की 1 जून की भविष्यवाणी से तीन दिन देरी से है।
यह 2015 के बाद पहली बार है जब IMD की भविष्यवाणी तय सीमा से बाहर रही।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)
केरल में आखिरकार 4 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दस्तक दे दी है, लेकिन यह भारतीय मौसम विभाग (IMD) की भविष्यवाणी से तीन दिन देरी से हुआ। IMD ने पहले अनुमान लगाया था कि मानसून 1 जून तक केरल पहुंचेगा, जिसमें चार दिन की त्रुटि सीमा शामिल थी। हालांकि, इस बार यह पहली बार है जब 2015 के बाद IMD की भविष्यवाणी इस सीमा से बाहर रही है।
इस देरी ने मानसून की सटीकता और इसके प्रभावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत में मानसून का समय पर आना कृषि और जल संसाधनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसान और नीति निर्माता मानसून की प्रगति पर करीबी नजर रखते हैं क्योंकि यह फसल की बुवाई और जल उपलब्धता को सीधे प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल मानसून पर 'एल नीनो' का प्रभाव पड़ सकता है। 'एल नीनो' एक जलवायु घटना है, जो बारिश के पैटर्न को बाधित करने के लिए जानी जाती है। अगर इसका प्रभाव बढ़ता है, तो यह देशभर में बारिश के वितरण को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, IMD ने अभी तक इस देरी के कारणों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
केरल में मानसून का आगमन भारत में बारिश के मौसम की शुरुआत का संकेत देता है। यह देश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति और इसके संभावित प्रभावों पर और अपडेट का इंतजार किया जा रहा है। Read full story for details.