भारत-नेपाल सीमा विवाद: MEA ने तीसरे पक्ष की भूमिका को किया खारिज

भारत ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि सीमा विवाद का समाधान द्विपक्षीय बातचीत से ही संभव है। MEA ने किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया।

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भारत ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि सीमा विवाद का समाधान द्विपक्षीय बातचीत से ही संभव है।

MEA ने किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)

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भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे का समाधान केवल द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से ही संभव है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हाल ही में दावा किया था कि सीमा विवाद जटिल है और दोनों देशों के पास एक-दूसरे के क्षेत्रों का कब्जा है। उन्होंने इस मामले में ब्रिटेन और चीन की मध्यस्थता की मांग की थी। इस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया।

MEA के प्रवक्ता ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद का समाधान केवल आपसी बातचीत और सहयोग से ही किया जा सकता है। यह बयान नेपाल के सत्तारूढ़ पार्टी प्रमुख के साथ हुई बैठक के दौरान दिया गया। भारत ने हमेशा से इस मुद्दे पर द्विपक्षीय तंत्र के माध्यम से समाधान की वकालत की है और शांतिपूर्ण बातचीत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है।

भारत-नेपाल सीमा विवाद लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है, जहां दोनों देशों ने विवादित क्षेत्रों पर अपने-अपने दावे किए हैं। हालांकि, भारत ने क्षेत्रीय कूटनीति में आपसी समझ और सहयोग को प्राथमिकता दी है और बाहरी हस्तक्षेप को अस्वीकार किया है।

MEA का यह बयान भारत की क्षेत्रीय नीति को दर्शाता है, जिसमें पड़ोसी देशों के साथ संवाद और सहयोग के माध्यम से विवादों को सुलझाने पर जोर दिया गया है। इस मुद्दे पर आगे की बातचीत का इंतजार किया जा रहा है। Read full story for details.