ग्रेट निकोबार, मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित होने के कारण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान बन सकता है।
यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम है और भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूत कर सकता है।
ग्रेट निकोबार, मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित होने के कारण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान बन सकता है।
यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम है और भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूत कर सकता है।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)
ग्रेट निकोबार, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का हिस्सा, भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। इसका स्थान मलक्का जलडमरूमध्य के पास है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह जलडमरूमध्य ऊर्जा और निर्मित वस्तुओं के परिवहन के लिए सबसे छोटा और किफायती मार्ग है। वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग दो-तिहाई और 70-80% तेल आयात इसी मार्ग से गुजरता है।
भारत के लिए ग्रेट निकोबार का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह क्षेत्र इंडो-पैसिफिक में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक रणनीतिक निगरानी केंद्र के रूप में काम कर सकता है। चीन की बढ़ती क्षेत्रीय गतिविधियों को देखते हुए, ग्रेट निकोबार भारत को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नजर रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने का मौका देता है।
इसकी तुलना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से की जा रही है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए अहम है। इसी तरह, मलक्का जलडमरूमध्य भारतीय और प्रशांत महासागरों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ग्रेट निकोबार भारत के लिए एक प्रमुख समुद्री केंद्र बन सकता है, जो न केवल व्यापार बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति के तहत ग्रेट निकोबार में विकास कार्यों को तेज करने से देश की समुद्री सुरक्षा और व्यापार क्षमता को और मजबूती मिल सकती है। Read full story for details.