भारत में विदेशी नागरिकों के लिए इमिग्रेशन नियमों में बदलाव, ऑनलाइन अपील का विकल्प मिला

केंद्र सरकार ने विदेशी नागरिकों के रजिस्ट्रेशन और अपील से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। अब 180 दिन पूरे होने से पहले कभी भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। साथ ही, पहली बार ऑनलाइन अपील का प्रावधान जोड़ा गया है।

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केंद्र सरकार ने विदेशी नागरिकों के रजिस्ट्रेशन और अपील से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं।

अब 180 दिन पूरे होने से पहले कभी भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।

साथ ही, पहली बार ऑनलाइन अपील का प्रावधान जोड़ा गया है।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)

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केंद्र सरकार ने भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों के लिए इमिग्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। गृह मंत्रालय ने इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के तहत विदेशी नागरिक अब 180 दिन पूरे होने से पहले किसी भी समय रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। पहले यह प्रक्रिया 180 दिन पूरे होने के बाद 14 दिनों के भीतर पूरी करनी होती थी। अब तय समय निकलने के बाद रजिस्ट्रेशन केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाएगा।

इसके अलावा, पहली बार ऑनलाइन अपील का विकल्प भी दिया गया है। किसी आदेश से प्रभावित व्यक्ति अब ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त के पास ऑनलाइन अपील कर सकता है। अपील आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर करनी होगी। आयुक्त को संबंधित पक्ष की सुनवाई के बाद 60 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करने की कोशिश करनी होगी।

बच्चों की नागरिकता से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अगर माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक है और बच्चे की भारतीय नागरिकता बनाए रखना चाहता है, तो बच्चे पर विदेशी नागरिकों के रजिस्ट्रेशन वाले नियम लागू नहीं होंगे। वहीं, अगर भारत में रह रहा कोई बच्चा किसी दूसरे देश की नागरिकता लेता है, तो उसके माता-पिता को 30 दिनों के भीतर इसकी जानकारी रजिस्ट्रेशन अधिकारी को देनी होगी। कुछ मामलों में यह समय सीमा 24 घंटे तय की गई है।

गृह मंत्रालय ने ये बदलाव इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत किए हैं। यह कानून मार्च 2025 में संसद द्वारा पास किया गया था। इसके तहत भारत में आने वाले हर विदेशी के पास वैध पासपोर्ट और वीजा होना अनिवार्य है। साथ ही, गैरकानूनी तरीके से किसी विदेशी को देश में लाने या ठहराने पर 3 साल की जेल या 2 से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।