Google की लाइफ साइंसेज कंपनी Verily ने डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए 3.2 करोड़ बाँझ नर मच्छर छोड़े हैं।
इस पहल का मकसद मच्छरों की संख्या कम करना है, और चूंकि नर मच्छर काटते नहीं हैं, इसलिए इससे इंसानों को खतरा नहीं होगा।
Google की लाइफ साइंसेज कंपनी Verily ने डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए 3.2 करोड़ बाँझ नर मच्छर छोड़े हैं।
इस पहल का मकसद मच्छरों की संख्या कम करना है, और चूंकि नर मच्छर काटते नहीं हैं, इसलिए इससे इंसानों को खतरा नहीं होगा।

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डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों से निपटने के लिए Google की लाइफ साइंसेज डिवीजन Verily ने एक अनोखी पहल शुरू की है। इस पहल के तहत 3.2 करोड़ बाँझ नर मच्छर छोड़े गए हैं। इन मच्छरों को खास वैज्ञानिक तकनीकों से बाँझ बनाया गया है। जब ये बाँझ नर मच्छर जंगली मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, तो उनके अंडे नहीं फूटते। इससे धीरे-धीरे मच्छरों की संख्या कम होने लगती है।
इस तकनीक को केमिकल पेस्टीसाइड्स के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल माना जा रहा है। पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल अक्सर पर्यावरण और इकोसिस्टम पर बुरा असर डालता है, जबकि यह तरीका पूरी तरह से बायोलॉजिकल है।
Verily की यह पहल उन इलाकों में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए की गई है, जहां हर साल लाखों लोग इनसे प्रभावित होते हैं। खासतौर पर ट्रॉपिकल और सब-ट्रॉपिकल इलाकों, जिनमें भारत भी शामिल है। इस प्रोजेक्ट में सिर्फ नर मच्छरों को शामिल किया गया है, क्योंकि नर मच्छर इंसानों को नहीं काटते। इससे मच्छरों की संख्या कम करने के साथ-साथ काटने वाले मच्छरों की संख्या बढ़ने का खतरा भी नहीं होता।
3.2 करोड़ बाँझ मच्छरों को छोड़ना टेक्नोलॉजी और साइंस के जरिए पब्लिक हेल्थ की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस पहल के लंबे समय तक क्या नतीजे होंगे, यह अभी देखना बाकी है। लेकिन वैज्ञानिकों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उम्मीदें और उत्साह है।