दिल्ली के मालवीय नगर में एक गेस्ट हाउस में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई।
घटना ने सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दिल्ली के मालवीय नगर में एक गेस्ट हाउस में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई।
घटना ने सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)
दिल्ली के मालवीय नगर में एक छह मंजिला गेस्ट हाउस में भीषण आग लगने से 21 लोगों की जान चली गई। यह हादसा 3 जून की सुबह हुआ, जब ग्राउंड फ्लोर पर स्थित रेस्टोरेंट में आग लगी और धीरे-धीरे ऊपर की मंजिलों तक फैल गई। गेस्ट हाउस में ठहरे अधिकांश लोग विदेशी नागरिक थे, जो नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका से आए थे। वे पास के अस्पताल में इलाज करा रहे अपने परिजनों के साथ ठहरे हुए थे।
गेस्ट हाउस, जिसका नाम 'फ्लोरिश इन' है, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए संचालित हो रहा था। इसे केवल छह कमरों की अनुमति मिली थी, लेकिन मालिकों ने इसे अवैध रूप से 25 कमरों तक बढ़ा दिया। इसके अलावा, गेस्ट हाउस के पास फायर सेफ्टी का NoC भी नहीं था। आग लगने के बाद स्थानीय लोगों ने मदद की कोशिश की और गद्दे बिछाकर ऊपरी मंजिलों से कूदने वालों को बचाने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड की सात गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और 45 लोगों को बचाया गया, लेकिन 21 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की कमी को उजागर किया है। राजनीतिक नेताओं ने संवेदनाएं व्यक्त कीं और जांच की मांग की, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस बार भी जिम्मेदारी तय करने में देरी होगी। दिल्ली में अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
यह हादसा एक बार फिर से दिखाता है कि शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की कितनी जरूरत है। Read full story for details.