27 मई को दिल्ली सरकार ने नई फायर सेफ्टी योजना का प्रस्ताव दिया, जिसमें निजी फायर ऑडिटर्स से इमारतों को फायर क्लीयरेंस देने की बात कही गई।
हालिया आग की घटना में 21 लोगों की मौत के बाद इस प्रस्ताव पर सवाल उठ रहे हैं।
27 मई को दिल्ली सरकार ने नई फायर सेफ्टी योजना का प्रस्ताव दिया, जिसमें निजी फायर ऑडिटर्स से इमारतों को फायर क्लीयरेंस देने की बात कही गई।
हालिया आग की घटना में 21 लोगों की मौत के बाद इस प्रस्ताव पर सवाल उठ रहे हैं।

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दिल्ली सरकार की नई फायर सेफ्टी योजना पर हालिया आग की घटना के बाद गंभीर सवाल उठने लगे हैं। 27 मई को सरकार ने एक नया फायर सेफ्टी फ्रेमवर्क पेश किया था। इस योजना के तहत इमारतों को फायर क्लीयरेंस अब निजी फायर ऑडिटर्स के जरिए दिया जा सकेगा। सरकार का कहना था कि इस कदम से प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकेगा और सरकारी एजेंसियों पर निर्भरता कम होगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव के कुछ ही दिनों बाद एक दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। हाल ही में हुई एक आग की घटना में 21 लोगों की जान चली गई। इस हादसे ने इस योजना की विश्वसनीयता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि निजी ऑडिटर्स की जवाबदेही और उनकी क्षमता को लेकर कई चिंताएं हैं।
विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि निजी फायर ऑडिटर्स की भूमिका और उनकी जिम्मेदारी को स्पष्ट करना बेहद जरूरी है।
इस घटना के बाद सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह इस प्रस्ताव की गहराई से समीक्षा करे। फिलहाल, सरकार ने इस मुद्दे पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है। यह देखना बाकी है कि सरकार इस योजना में कोई बदलाव करती है या नहीं।
इस बीच, विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह इस योजना को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा और समीक्षा सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इससे सुरक्षा मानकों में कोई कमी न आए।
आग की इस घटना ने एक बार फिर से फायर सेफ्टी के महत्व को उजागर किया है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या इस योजना में कोई बदलाव किया जाएगा। Read full story for details.