शिवमोग्गा के KSNUAHS यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर पद के लिए बनी सर्च कमेटी पर हितों के टकराव का आरोप लगा है।
कमेटी में मौजूदा वाइस-चांसलर को शामिल करने पर विशेषज्ञों ने चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
शिवमोग्गा के KSNUAHS यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर पद के लिए बनी सर्च कमेटी पर हितों के टकराव का आरोप लगा है।
कमेटी में मौजूदा वाइस-चांसलर को शामिल करने पर विशेषज्ञों ने चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

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शिवमोग्गा की कर्नाटक स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल एंड हॉर्टिकल्चरल साइंसेज (KSNUAHS) के वाइस-चांसलर पद के लिए बनी सर्च कमेटी पर विवाद खड़ा हो गया है। कृषि विभाग ने 14 मई को एक नोटिफिकेशन जारी कर इस कमेटी का गठन किया था, लेकिन इसमें मौजूदा वाइस-चांसलर को शामिल करने पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कमेटी का काम योग्य उम्मीदवारों का चयन करना है, लेकिन इसके गठन को लेकर आलोचना हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वाइस-चांसलर की मौजूदगी से चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। एक शिक्षाविद ने कहा, "यह चयन प्रक्रिया की ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।"
इस मुद्दे ने अकादमिक जगत में बहस छेड़ दी है। कई लोगों ने कमेटी की संरचना की समीक्षा करने और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की है। आलोचकों ने कृषि विभाग से इस मामले को तुरंत सुलझाने की अपील की है ताकि संस्थान और नेतृत्व चयन प्रक्रिया की साख बनी रहे।
सर्च कमेटी का काम जारी है, लेकिन इस विवाद ने सार्वजनिक नियुक्तियों में नैतिक मानकों को बनाए रखने की अहमियत को एक बार फिर उजागर किया है। इस प्रक्रिया का नतीजा न केवल KSNUAHS बल्कि देशभर के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के प्रशासन पर भी असर डाल सकता है।