चीन ने हाल ही में द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर जीत की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर एक हाई-प्रोफाइल समारोह आयोजित किया। इस आयोजन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को प्रमुखता से मंच पर स्थान दिया गया। यह कदम जानबूझकर उठाया गया, जो इन तीन देशों के बीच बढ़ती नजदीकी को दर्शाता है।
इस आयोजन ने चीन की विदेश नीति में संभावित बदलावों की ओर इशारा किया है। रूस और उत्तर कोरिया के साथ चीन की यह सार्वजनिक एकजुटता ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कूटनीतिक चाल से चीन के उन देशों के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं, जिनके रूस और उत्तर कोरिया के साथ मतभेद हैं।
इस समारोह के जरिए चीन ने अपने ऐतिहासिक दृष्टिकोण को उजागर करने का प्रयास किया, लेकिन पुतिन और किम जोंग उन की उपस्थिति ने इस आयोजन को और जटिल बना दिया है। यह कदम चीन की वैश्विक रणनीति और उसकी छवि पर गहन चर्चा का विषय बन गया है। अब यह देखना होगा कि इस कूटनीतिक संदेश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है। Read full story for details.