तेलुगु देशम पार्टी (TDP) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने दिवंगत नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एनटीआर को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है।
इस कदम से एनटीआर की विरासत और नायडू के साथ उनके जटिल संबंधों पर चर्चा फिर से तेज हो गई है।
तेलुगु देशम पार्टी (TDP) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने दिवंगत नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एनटीआर को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है।
इस कदम से एनटीआर की विरासत और नायडू के साथ उनके जटिल संबंधों पर चर्चा फिर से तेज हो गई है।

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तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में पार्टी के संस्थापक और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नंदमुरी तारक रामाराव (NTR) को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है। एनटीआर, जो एक महान अभिनेता और राजनीति में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं, ने 1982 में TDP की स्थापना की थी। उनकी विरासत आज भी आंध्र प्रदेश की राजनीति और सिनेमा में गहरी छाप छोड़ती है।
हालांकि, एनटीआर और चंद्रबाबू नायडू के बीच संबंध हमेशा सहज नहीं रहे। दोनों के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत रिश्ते कई बार तनावपूर्ण रहे। 1995 में हुए एक विवादास्पद राजनीतिक घटनाक्रम में नायडू ने पार्टी की कमान अपने हाथों में ले ली थी, जिससे उनके और एनटीआर के बीच दरार और गहरी हो गई।
नायडू का यह कदम ऐसे समय में आया है जब TDP अपनी स्थिति मजबूत करने और एनटीआर की विरासत को फिर से जनता के सामने लाने की कोशिश कर रही है। नायडू का यह बयान न केवल एनटीआर के योगदान को सम्मान देने का प्रयास है, बल्कि पार्टी और राज्य की राजनीति में उनके महत्व को भी दोबारा स्थापित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
इस मांग ने एनटीआर और नायडू के बीच के जटिल रिश्तों और TDP के इतिहास पर नई बहस छेड़ दी है।