देश के 166 जलाशयों में पानी का स्तर गिरा, 15 बांध गंभीर संकट में

मई के अंत तक देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता का केवल 24.75% रह गया। एक महीने में 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हुआ। दक्षिण भारत में स्थिति सबसे गंभीर है।

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मई के अंत तक देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता का केवल 24.75% रह गया।

एक महीने में 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हुआ।

दक्षिण भारत में स्थिति सबसे गंभीर है।

AI-generated illustration · NewsDarpan (GPT-Image-2)

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देश में पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मई के अंत तक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता का केवल 24.75% रह गया है। मई की शुरुआत में यह आंकड़ा 36.41% था, लेकिन गर्मी और बढ़ती खपत के चलते एक महीने में 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हो गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 15 बड़े बांधों में पानी का स्टॉक सामान्य से आधा रह गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि वर्तमान जल स्तर पिछले साल की इसी अवधि और पिछले दस साल के औसत से थोड़ा बेहतर है। लेकिन तेजी से खाली हो रहे जलाशय आने वाले हफ्तों में बड़ी चुनौती खड़ी कर सकते हैं। गंभीर संकट वाले बांधों की संख्या मई के महीने में 11 से बढ़कर 15 हो गई है।

दक्षिण भारत में हालात सबसे चिंताजनक हैं। मई की शुरुआत में यहां जलाशयों में कुल क्षमता का 26.83% पानी था, जो महीने के अंत तक घटकर केवल 17.55% रह गया। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में जल संकट बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी बांध और बिहार का चंदन बांध जैसे जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं।

पानी की इस कमी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है। देश की 20 जल विद्युत परियोजनाओं में से 6 बड़े जलाशयों की स्थिति नाजुक बनी हुई है।